एक प्रेत आत्मा।

           एक प्रेत आत्मा.....




     मेरा नाम रितिका है। यह बात 15 साल पहले कि है। जब मे अपनी नानी के घर गए थी। आज उस बात को बीते हुए 15 साल हो गए फिरभी उसे याद करने पर मेरी रूह काप उठती है। में सिर्फ 10 साल की थी। 
 
     मुझे आज भी ठीक से याद है वो अंधेरी रात वो साया।...

    


      उस रात में छत पर सो रहीं थीं अचानक एक पायल की आवाज आती हैं । मुजे अचानक किसी ने अपनी तरफ खींचा ऐसा महसूस हुआ। मेने देखा तो कोई नहीं था। फिरसे एक आवाज आती है....पर इस बार पायल की नहीं.....। किसी ने मेरा नाम पुकारा रितिका....में जोर से चिल्लाकर नीचे की तरफ भागी...पर देखा तो दरवाजे के पास एक साया था। में आगे बढ़ती उससे पहले ही किसी ने मुझे पिछे से आवाज लगाई रितिका.....मेने पिछे देखा तो कोई नहीं था तभी दूर एक पेड़ के पीछे से कटा हुआ सिर दिखा...वो मुजे देखकर हस रहा था। 

     

    




    आगे देखा था तो वो साया गायब हो गया मेरे सामने। फिर क्या हुआ मुझे नहीं पता नहीं । मे सुबह उठी ।सब को मेने ये बात बताई किसी ने मेरी बात पर यकीन नहीं किया सिवाय एक के........मेरी नानी .....wait for next part.....

 

   

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